संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

अन्धापन दूर करना

मेरी बेटी सीमा आयु 8 वर्ष, जब वह 6 वर्ष की थी, तब एक दिन उसे अचानक दिखाई देना बंद हो गया। डॉक्टरों ने जाँच करके बताया कि आँखें तो ठीक हैं मगर देखने वाली (आपटिक नर्व) मर गई हैं। अब इसका कोई इलाज नहीं है। कई जगह दिखाया, सभी ने यही जवाब दिया। आल इण्डिया मेडिकल इन्सटीट्यूट के डॉक्टरों ने भी कहा कि उसे पूरा जीवन अन्धे रहकर ही बिताना होगा। मेरे एक मित्र ने मुझे संत श्रद्धाराम आश्रम में ले जाने की सलाह दी। वहाँ गुरुजी (कर्नल अमर सिंह जी) ने मेरी बेटी की आँखों पर तीन बार हाथ लगाया और वह देखने लग गई। यह एक चमत्कार ही था। वहाँ बैठे साठ-सत्तर आदमियों ने मिलकर जोर से बापू जी की जय बोली। गुरुजी ने मुझे तीन बार मन्दिर में अपनी बेटी का मत्था टिकाने के लिए कहा। अब वह बिल्कुल ठीक है।

सत्यपाल
मकान नं0-एच 2 डी. ई. एस. यू० कॉलोनी
त्रिफेलिया-प्रतापबाग दिल्ली

मेरी दोनों आँखों की रोशनी चली गई। एक आँख का दो बार तथा दूसरी आँख का तीन बार आई (EYE) अस्पताल, सीतापुर में ऑपरेशन हुआ, मगर कोई आराम न आया। जब मेरे पिता मुझे महाराज अमर सिंह जी के पास लेकर आये तो मुझे सूर्य भी दिखाई नहीं देता था। गुरुजी ने मेरी आँखों पर हाथ फेरा। तीन दिन बाद मैं बल्ब की रोशनी देखने लगा। दस दिन बाद मैंने पशु, स्कूटर और आदमी को देखकर कहा कि मुझे पशु या आदमी की परछाई सी लगती है। हाथ को हिलता देखकर कहा कि हाथ ऊपर से नीचे या दायें बायें हिल रहा है। 20 दिन बाद मुझे साफ तो दिखाई नहीं देता था मगर सामने जो चीज आती उसे देखकर कहता कि आगे कुछ है और मैं अपना बचाव कर लेता । कहीं जाना होता तो अपने आप चला जाता। अब दूसरे आदमी के सहारे की जरूरत खत्म हो गई है। इसके बाद मुझे किसी कारण से अलमोड़ा जाना पड़ गया और मैं इलाज के लिए न आ सका। मैं उनके आशीर्वाद से इतना तो देख पाता हूँ कि दूसरे आदमी का सहारा लिये बिना थोड़ा बहुत चल फिर लेता हूँ।

अजय पुत्र राम अवतार अरोड़ा-नीलवाले
151 गोपाल पार्क, देहली-51.

मेरी बेटी सीमा आयु 8 वर्ष, जब वह 6 वर्ष की थी, तब एक दिन उसे अचानक दिखाई देना बंद हो गया। डॉक्टरों ने जाँच करके बताया कि आँखें तो ठीक हैं मगर देखने वाली (आपटिक नर्व) मर गई हैं। अब इसका कोई इलाज नहीं है। कई जगह दिखाया, सभी ने यही जवाब दिया। आल इण्डिया मेडिकल इन्सटीट्यूट के डॉक्टरों ने भी कहा कि उसे पूरा जीवन अन्धे रहकर ही बिताना होगा। मेरे एक मित्र ने मुझे संत श्रद्धाराम आश्रम में ले जाने की सलाह दी। वहाँ गुरुजी (कर्नल अमर सिंह जी) ने मेरी बेटी की आँखों पर तीन बार हाथ लगाया और वह देखने लग गई। यह एक चमत्कार ही था। वहाँ बैठे साठ-सत्तर आदमियों ने मिलकर जोर से बापू जी की जय बोली। गुरुजी ने मुझे तीन बार मन्दिर में अपनी बेटी का मत्था टिकाने के लिए कहा। अब वह बिल्कुल ठीक है।

श्री मांगेराम
मकान नं0 93, पंजाबी कॉलोनी
नरेला-दिल्ली

मेरे बेटे चन्द्र प्रकाश का एक्सीडेण्ट हो गया था। सिर पर चोट आने की वजह से दिमाग का ऑपरेशन भी हुआ पर लड़का अंधा हो गया। उमे कुछ भी दिखाई नहीं देता था। हम उसे संत श्रद्धाराम आश्रम में अमर सिंह जी महाराज के पास लेकर गये। उन्होंने बच्चे की आँखों पर अपना दाहिना हाथ फेरा और कहा कि कई बार आना पड़ेगा, लड़का सब कुछ देखेगा चिन्ता न करें। हम उसे कई बार महाराज जी के पास ले गये। अब मेरा बेटा बिल्कुल ठीक है। यह महाराज जी की असीम कृपा तथा आशीर्वाद में ठीक हुआ है। क्योंकि न कोई दवा दी न कोई पैसा लिया। मेरा एक हो लड़का है इसलिए मैं महाराज जी का बहुत एहसान मानता हूँ और आजीवन उनका आभारी रहूँगा।

धर्मपाल
एच-4/23, डब्बल स्टोरी.
लाजपत नगर, देहली-24

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