संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

खोए हुए आदमी को बुलाना

सेलम, तामिलनाडु में 20 अगस्त 1994 को मेरे 24 वर्षीय पुत्र का बदमाशों ने कुछ सुंघाकर अपहरण कर लिया। 21 अगस्त को मैं अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ गुरुजी के आश्रम आया। हमने गुरुजी से प्रार्थना की किसी भी तरह हमारे बच्चे की रक्षा करो और उसे घर वापिस लाओ। गुरु जी ने दो मिनिट तक आँखे बंद की और बताया, “बच्चे का बस से अपहरण कर लिया है और इस समय बदमाश उसे लेकर ट्रेन में सफर कर रहे हैं। उनकी योजना बच्चे को बम्बई में लाकर रखना और बदले में तुमसे फिरौती वसूलना है । तुम घबराओ नहीं, मैं जाता हूँ और बच्चे को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाकर लाता हूँ। नौ बजे तक तुम्हारा बच्चा भी तुम्हें मिल जायेगा और तुम्हें पैसा भी नहीं देना पड़ेगा। गुरु जी ने परकाया प्रवेश क्रिया करके बच्चे के दिमाग को अपने मुताबिक चलाना शुरू किया। बच्चे ने बदमाशों से कहा-मुझे पेशाब जाना है। एक बदमाश उसे टॉयलेट ले गया। बच्चे ने अन्दर जाकर कुण्डी बन्द कर दी। तभी बच्चे ने देखा कि टॉयलेट की खिड़की में लगे दो सरिये और शीशे का फ्रेम अपने आप टूट कर बाहर गिर गए। गाड़ी जैसे ही शोलापुर स्टेशन पर रूकी, लड़का टॉयलेट की टूटी हुई खिड़की से बाहर निकला और प्लेटफार्म की बाउन्ड्री को कूद करके सड़क पर आ गया। फिर वह एक होटल में घुस गया। उसने होटल के मैनेजर से कहा कि पहले मुझे छुपाओ, फिर मेरी कहानी सुनो। मैनेजर ने बच्चे की पूरी कहानी सुनी फिर उसकी बात टेलीफोन पर दिल्ली में हम से ठीक नौ बजे कराई ।
जब मैंने गुरुजी को इस बारे में बताया तो उन्होंने कहा पाँच आदमी जाओ और लड़के को बम्बई लाकर उसे हवाई जहाज से दिल्ली ले जाओ। हमारा बम्बई का बिजनेस एजेन्ट चार आदमियों को साथ लेकर गया। लड़के को शोलापुर से बम्बई लाकर, दिल्ली के जहाज में बैठा दिया और हमको फोन पर बता दिया। हम उसे एरोड्रॉम से घर ले आये । 23 अगस्त 1994 को मैं अपने बच्चे के साथ गुरुजी के आश्रम में मत्था टेकने गया।
नोट- लड़के और लड़के के पिता का नाम व पता किसी विशेष कारण से इस पुस्तक में नहीं दिया जा रहा। लड़के तथा उसके पिता द्वारा लिखा गया कृतज्ञता का पत्र (पूरे विवरण सहित) आश्रम में रखा है।

Call Us Now
WhatsApp