मैं जगदीश त्रेहान, अकसर गुरुजी के पास आता-जाता रहता था । एक दिन मेरा पुत्र 15 अगस्त 1995 को बिना कुछ बताये घर से गायब हो गया। जब दो दिन तक वह वापस नहीं लौटा, तो मैं गुरुजी के पास परेशान हालत में पहुँचा। गुरुजी ने कहा “कल शाम तक लड़के से सम्पर्क हो जायेगा और 20 अगस्त तक बच्चा घर आ जाएगा। हमने ऐसी अरदास कर दी है। तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं।” ऐसा ही हुआ। अगले दिन मेरे पुत्र सुनील ने मुझे फोन करके बताया कि वह इस समय जम्मू में है और किसी घरेलू कारण से घर छोड़ आया है। मैंने उसे लौट आने के लिए कहा। 20 अगस्त 1995 को लड़का घर लौट आया।
श्री जगदीश त्रेहान 246-ए, पंजाबी बस्ती, सराय पीपल थला दिल्ली-110033
मैं सुदामा, मेरे छोटे भाई को हमारे गाँव का ही एक आदमी अपने साथ दिल्ली ले आया था और उसने उसे अपनी मादीपुर स्थित फैक्ट्री में काम पर लगा दिया था। एक दिन मैं अपने भाई से मिलने मादीपुर गया तो मुझे पता चला कि मेरा भाई दस-बारह दिन से गुम है। मालिक तथा तीन-चार वर्कर अलग- अलग बातें कर रहे थे। मैं परेशान होकर गुरुजी के पास आया। गुरुजी ने बताया “फैक्ट्री के मालिक ने तुम्हारे भाई को पीटा है। इसलिए वह उससे तंग आकर घर जाने के लिए वहाँ से निकल आया है। उसके पास पैसा-धेला न होने के कारण उसने किसी के यहाँ नौकरी कर ली है। घबराने की बात नहीं है। तेरे भाई को घर जाने के लिए बोल दिया है। वह दस दिन के भीतर घर पहुँच जाएगा।” बिल्कुल ऐसा ही हुआ जैसा गुरु जी ने बताया था मेरा भाई आठवें दिन ही मेरे घर पहुँच गया।
सुदामा मॉडल टाउन-दिल्ली
मेरा बेटा गुरमेल सिंह 3 अक्टूबर 1995 को घर से गुम हो गया। मैं 5 अक्टूबर 1995 को इस आश्रम में आया और महाराज अमर सिंह जी से प्रार्थना की कि मेरे लड़के को घर बुला दो। महाराज जी ने कहा कि तुम्हारा बेटा एक हफ्ते में तुम्हारे घर पहुँच जायेगा और वास्तव में मेरा लड़का 12 अक्टूबर 1995 को सातवें दिन घर लौट आया। मैं महाराज जी का आभारी हूँ।
सरदारा सिंह, 62 डी जनता फ्लैट लाल क्र्वाटर, पंजाबी बाग, दिल्ली-110026