( 1 ) सत्संग
( i ) वार्षिक सत्संग यज्ञ – चैत्र माह की शुकल पक्ष त्रयोदशी को सुबह ७ बजे से दोपहर बाद २ बजे तक सत्संग , तदोपरान्त भंडारा और इसके उपरान्त कार्यक्रम पुर्ण होता है इसमें उच्च कोटि के संत महात्मा आकर उपदेश देते है
( ii ) बापू संत अमर सिंह जी की महासमाधि – महाराज की पुण्यतिथि दिनांक 2 दिसंबर को प्रतिवर्ष विशाल सत्संग व भंडारा होता है।
(iii) मासिक सत्संग – हर पूर्णिमा को शाम 6 बजे से 8 बजे तक सत्संग, उसके बाद आरती, अरदास, चंद्रमा की किरणों से विशेष उपचार आशीर्वाद, भंडारा और इसके पश्चात कार्यक्रम पूर्ण होता है।
(iv) साप्ताहिक सत्संग – रविवार को प्रातः 8 से 10 बजे तक सत्संग होता है।
नाम – दान – दीक्षा
मौज होने पर सुपात्र व्यक्ति को चेतन नाम, दान, और दीक्षा दी जाती है। जो व्यक्ति दीक्षा पत्र नहीं है, उसे सत्संग स्वर शिक्षा दी जाती है और योग्य होने पर ही उसे दीक्षित किया जाता है। समय आदि नियमों का बंधन नहीं है, फिर भी सुविधा के लिए हर रविवार प्रातः 11 से दोपहर 1 बजे तक समय रखा गया है।
ध्यान समाधि
केवल दीक्षित व्यक्ति ही इसके अधिकारी होते हैं, इसलिए दीक्षित व्यक्तियों को रविवार प्रातः 7 से 8 बजे ध्यान में बैठाया जाता है। चेतन दीक्षा होने से मन जल्दी शांत होता है। महाराज जी की उपस्थिति होने से उनके शरीर से निकलने वाली योग-शक्ति भी साधक के मन को आकर्षित करने में बहुत सहायक होती है।
कष्ट निवारण
बुधवार से शनिवार प्रातः 8 बजे से 12 बजे तक संकल्प शक्ति और आशीर्वाद द्वारा लगभग सभी प्रकार के कष्टों का निवारण किया जाता है। संत अमर सिंह महाराज के समय में कभी-कभी फोन पर भी पीड़ा दूर की जाती थी। (कठिन, साध्य और असाध्य रोगों से पीड़ित बीमारों को भी चमत्कारी लाभ होता था। इनसे संबंधित कुछ विवरण इस पुस्तक के चमत्कारिक घटनाओं में दिए गए हैं।) सेवा निःशुल्क की जाती है। रविवार को ध्यान, सत्संग और नामदान का कार्यक्रम होता है, और सोमवार और मंगलवार को अवकाश होने के कारण उपचार नहीं किया जाता है।
विशेष उपचार
अमावस्या को सुबह सूर्य निकलने से आरंभ कर दिन भर के बाद तक सूर्य की किरणों से उपचार किया जाता है। साथ ही, विशेष आशीर्वाद भी इसी क्रम में दिया जाता है। संगत और रोगियों को आश्रम की ओर से नाश्ता भी प्रदान किया जाता है।
पूर्णिमा को शाम 6 बजे भजन, कीर्तन, सत्संग, आरती और अरदास के बाद चंद्र की किरणों से विशेष इलाज किया जाता है और आशीर्वाद दिया जाता है। इसके बाद गुरु का लंगर और भंडारा होता है।
नोट:
यदि अमावस्या या पूर्णिमा रविवार या मंगलवार को पड़ती है, तो अन्य कार्यक्रम रद्द करके विशेष उपचार किया जाता है।
चेत्र माह की पूर्णिमा नहीं मनाई जाएगी।
उपचार के समय यदि ग्रहण पड़ता है, तो अमावस्या और पूर्णिमा नहीं मनाई जाएगी।
जन साधारण से मिलने का समय हर शनिवार शाम 5 से 7 बजे तक है।
कार्य समय के अलावा महाराज केवल फोन पर या अत्यधिक विशेष परिस्थितियों में ही मिलते हैं। अन्यथा, वे दोपहर बाद 2 से 5 बजे तक और रात 8 बजे से अगले दिन 7 बजे तक नहीं मिलते हैं।
आमतौर पर कार्यक्रम इसी प्रकार चलता है, फिर भी महाराज जी किसी नियम-रिवाज से बंधे नहीं हैं। मौसमी या किसी विशेष परिस्थिति में कोई भी कार्यक्रम बदला जा सकता है।