मैं हेमलता शुक्ला, बहुत दिनों से मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी से परेशान थी। काफी अस्पतालों से इलाज करवाने पर भी मुझे कोई लाभ नहीं हुआ था। किसी से मुझे गुरुजी के आश्रम के बारे में पता चला। गुरुजी अपने चमत्कारी हाथ से मेरी माँसपेशियों को छूते थे तो मुझे आराम मिलता था। हफ्ते में दो दिन मैं गुरुजी के पास इलाज लेने आती। लगातार तीन सप्ताह तक मैं आश्रम में आई। हर बार मुझे और आराम आता गया और अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। परमात्मा करें, गुरुजी इस दुनिया में इसी प्रकार सबका उद्धार करते रहें। मैं आजीवन गुरुजी की आभारी रहूँगी।
मैं एस0के0 जैन, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी नामक लाइलाज बीमारी से पीड़ित था। हर बड़े से बड़े डाक्टर से इलाज करवाने पर भी कुछ फायदा नहीं हुआ । आल इण्डिया मेडिकल इन्सटीट्यूट के डॉक्टरों ने तो मेरी मेडिकल फाईल पर यहाँ तक लिख दिया कि, “मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी का दुनिया भर में कोई इलाज नहीं है।” जब मैं आश्रम आया तो मेरे हाथ-पैर तथा शरीर का कोई भी अंग काम नहीं कर रहा था। गुरुजी ने अपना एक शाल मुझे ओढ़ा दिया, जिसे वे खुद साधना के समय अपने आसन पर रखते हैं फिर उन्होंने मेरी कनपटियों को छुआ, जिससे मेरे पूरे शरीर में करंट सा चलने लगा । हर रोज करीब दस मिनट तक मेरा इलाज गुरुजी करते रहे । मेरा उपचार चार महीनों तक चला। धीरे-धीरे मैं अपने अन्दर ताकत महसूस करने लगा। अब मैं ठीक हूँ। अब मैं कार-स्कूटर भी चला लेता हूँ, पैदल भी चलता फिरता हूँ। अपनी फैक्ट्री और दुकान का काम भी देख रहा हूँ। मुझे गुरुजी ने नया जीवन दिया है। मै सदैव उनका आभारी रहूँगा ।