संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

संतान बख्शना

मेरी शादी को आठ वर्ष हो गये थे मगर कोई सन्तान न हुई । बहुत इलाज कराया गया मगर सब व्यर्थ गया। डॉक्टरों ने अल्ट्रा साउन्ड तथा एक्सरे आदि देख कर बताया कि मेरी पत्नी की बच्चा दानी का डेवलपमेन्ट नहीं हुआ तथा बच्चा दानी का साईज एक छोटी चार पाँच वर्ष की बच्ची की बच्चा दानी के बराबर है। कोई इलाज नहीं हो सकता तथा बच्चा भी नहीं होगा । खानदान चलाने के लिए घर वालों ने दूसरी शादी के लिए जोर डाला। मैं महाराज अमर सिंह जी से पूछने गया था कि दूसरी शादी से मेरा जीवन दुःखदायी तो नहीं हो जायेगा। महाराज जी ने कहा कि यदि तुम ग्यारह दिन आकर बापूजी, उनके गुरुजी से प्रार्थना करो और कम से कम एक घंटा रोजाना आश्रम में बैठे रहो तो तुम्हारी औरत की बच्चा दानी ठीक हो जायेगी और खानदान चलाने के लिए पुत्र भी मिल जायेगा। मैंने ऐसा ही किया। मैं पत्नी को भी लाना चाहता था लेकिन महाराज जी ने मना कर दिया। मेरी पत्नी आश्रम में नहीं गई। मैं ही ग्यारह दिन जाता रहा। महाराज अमरसिंह तथा उनके गुरु संत श्रद्धाराम जी की कृपा से मुझे आशीर्वाद मिलने के ग्यारह माह बाद 23 जून 1994 को पुत्र पैदा हुआ। मैं आज 15 जुलाई 1994 को महाराज जी के बख्शे हुए पुत्र को लेकर अपनी पत्नी के साथ आशीर्वाद दिलाने के लिये आया हूँ। मेरा ऐसा विश्वास हो गया है कि महाराज अमर सिंह जी एक ब्रह्म स्वरूप महात्मा हैं। संतों की माया सन्त ही जाने । हम तो सदा इनके चरणों में रहना चाहते हैं।

प्रदीप
मकान नं0-75 सूरज पार्क
समय पुर-दिल्ली

मैंने महाराज अमर सिंह जी से प्रार्थना की कि हमें एक पोते का आशीर्वाद दें। यदि एक लड़का हो जावे तो मन को शान्ति मिले। इसके लिए मन सदा परेशान रहता है। महाराज जी ने कहा, “भाई तेरे जैसे भक्ति भाव रखने वाले तथा निर्मल चित वाले व्यक्ति की परेशानी हमसे भी नहीं देखी जाती । तू एक नहीं दो पोते ले जा। अभी अगस्त का महीना है. अगले साल अगस्त 1993 से पहले दो पोते हो जायेंगे। हमने बापू जी से तथा परमात्मा से अरदास कर दी है।” मेरे बेटे विजय की पत्नी से 6 जुलाई 1993 को लड़का हुआ जिसका नाम वैभव रखा। दूसरे बेटे विनय की पत्नी से 12 जुलाई 1993 को जो लड़का हुआ उसका नाम रोहन रखा गया। मेरा विश्वास है कि बापू के दरबार में यदि सच्चे हृदय से प्रार्थना की जाये तो झोली निश्चय ही भर जाती है। 

                                     ब्रिजमोहन कपूर II-A/II WEA करोल बाग दिल्ली-110005

राजेन्द्र गोयल, किरयाना मर्चेन्ट, शिवराम पार्क नांगलोई वाले की पत्नी कर्नल अमर सिंह महाराज से डॉक्टर सुभाष के घर मिली और पैरों में लेट कर रोने लगी, बोली कि लड़‌कियों की लाइन है, कम से कम खानदान का नाम लेने के लिए एक लड़का बख्शो। महाराज ने कहा, “रो मत, एक लड़का परमात्मा से दिला देते हैं। परमात्मा हमारी प्रार्थना मान लेता है। तुझे लड़का मिला समझ । 10 महीने इन्तजार कर, फिर बेटा खिला लेना।” वह बोली कि जन्म पत्री में लिखा है कि किस्मत में लड़का नहीं है। महाराज ने कहा मेरा मालिक किस्मत को मिटा कर नई लिख देता है। तुझे बेटा बख्श दिया है. अब किस्मत कुछ नही कर सकती। “उस स्त्री को तसल्ली न हुई और महाराज जी की बात उसके हिसाब से न जमी तो महाराज जी ने कहा कि 10 महीने बहुत दूर नहीं होते, आशीर्वाद का नतीजा देखने के बाद बात करना । 10 माह पूरे होते ही उसे पुत्र मिल गया। नामकरण संस्कार पर महाराज जी को बुला कर बच्चे को आशीर्वाद दिलाया ।

गीता जो कि स्वर्गीय श्री सोहन लाल आहू‌जा, लोदी कौलोनी बग्गी वाले की पुत्री तथा श्री राम प्रकाश सेठी के पुत्र अजय सेठी की पत्नी है, अपने पिता श्री आहूजा जी की मृत्यु के पश्चात् पहली बार जब ढक्का मन्दिर में कर्नल अमर सिंह जी से मिली तो अपने पिता की याद में फूट-फूट कर रोने लगी। महाराज अमर सिंह जी ने उसे सांत्वना देते हुए कहा कि आज से तू मुझे ही अपना पिता समझ और घबरा नहीं। कुछ दिन बाद गीता अपने पुत्र राहुल को इलाज के लिए संत श्रद्धाराम आत्मबोध-साधना आश्रम में लाई तो कर्नल अमर सिंह महाराज जी से बोली कि आपने मुझे बेटी कहा है, मेरी एक बात पूरी करनी पड़ेगी। मेरी देवरानी जो मेरे देवर पिन्टू की पत्नी है, उसे एक लड़का दे दो। मैं बाप के घर से खाली झोली लेकर नहीं जाऊँगी। महाराज जी ने कहा, “बस इतनी छोटी सी बात है. ले जा, एक बेटा उनके लिए भी ले जा। बापू के दरबार में बेटों की क्या कमी है, बापू के भन्डार में किसी भी चीज की कमी नहीं है, लेने वाला चाहिये, सब कुछ मिलता है यहाँ पर। पूर्णमासी को चबूतरे पर बैठकर विशेष आशीर्वाद के समय भी माँग करना, लड़का हो जायेगा।” गुरु महाराज की कृपा से उनको पुत्र मिल गया। वैसे तो सभी परिवार वाले खुश हुए लेकिन गीता की खुशी का अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि उसकी माँग बापू ने पूरी कर दी। 

मनोज, पुत्र श्री ओम् प्रकाश पाहवा, मकान नं0-1358 सेक्टर-37 नौएडा जिला गाजियाबाद अमर सिंह जी महाराज में बड़ी श्रद्धा रखता है।महाराज जी भी उसे बहुत प्यार करते हैं। उसका विवाह भी महाराज जी ने अपने आश्रम में ही करवाया था। एक दिन मनोज ने कहा कि आपने मेरे ऊपर कई उपकार किये हैं, एक उपकार और कर दो। पहला बच्चा मुझे लड़का दे दो। महाराज जी ने हँसकर कहा, चलो यह भी सही. बोल लड़का कब चाहिये? मनोज बोला जब आप उचित समझे। महाराज जी ने कहा जब देना ही है तो देरी क्यों करे। दस महीने में लड़का हो जायेगा। हमने बापू जी से मंजूरी ले ली है। परमात्मा की कृपा से उसे 10 महीने में ही लड़का हो गया। 24 जुलाई 1995 को महाराज जी ने बच्चे को चोला पहनाया तथा आशीर्वाद दिया ।

मैंने महाराज जी को फोन किया और बोला कि आपका काफी नाम सुना है हम दर्शन के लिए आना चाहते हैं, मगर मेरी पत्नी कहती है कि मैंने मन में मनोती माँगी है, माँग पूरी होने पर दर्शन को जायेंगे। महाराज जी ने पूछा कि माँग क्या है। तो मैंने कहा “जब आप जानी जान (अन्तर्यामी) हो तो खुद ही जान लो ।” महाराज जी ने तुरन्त बोला, “बापूजी ग्यारह महीने के अन्दर तुम्हें बेटा देकर तुम्हारी मनोकामना पूरी करेंगे, चिन्ता न करो तुम्हारी माँग मंजूर हो चुकी है।” साढ़े दस महीने बाद बापूजी की कृपा से हमारे यहाँ लड़का उत्पन्न हुआ तो हमने फोन पर महाराज जी को बताया कि लड़का माँगा था, आपके आशीर्वाद से मिल गया है। हम बच्चा 40 दिन का होने पर आपके दर्शन को आयेंगे। लेकिन हम जा न सके । बच्चा आठ माह का होने पर बच्चे को माथा टिकाकर आशीर्वाद दिलाने के लिए, हम आश्रम में 23 सितम्बर 1995 को पहुँचे । महाराज जी ने बच्चे को आशीर्वाद दिया और ओम् नारायण मन्दिर ढक्का, दिल्ली में झंडा चढ़ाने के लिए कहा। उनके कहने पर ढक्का मन्दिर में 24 सितम्बर 1995 को झंडा चढ़ाया।

सुनील अरोड़ा
50/51 रामास्वामी ले
आऊट 16 क्रास, 8 मेन लखसन्ड़रा,
बैंगलोर-560002

मैं अपनी पत्नी के साथ आश्रम में पूर्णमासी के सत्संग में आया। मेरी पत्नी अन्नू ने चबूतरे पर बैठकर विशेष आशीर्वाद के समय पुत्र की माँग की तथा कार्यक्रम के बाद महाराज जी से भी विनती की। महाराज जी ने कहा, ‘आशीर्वाद से तेरी झोली भर दी है। समझ लो कि तुम्हें पुत्र मिल गया। थोड़ा समय बीतने पर पुत्र आपकी गोद में होगा, चिन्ता न करो।’ गुरु महाराज की दया से एक माह बाद मेरी पत्नी गर्भवती हो गई। दस हफ्ते का गर्भ होने पर अल्ट्रा साउन्ड कराया तो लडकी निकली। मेरी पत्नी ने डॉक्टर के क्लिनिक से ही महाराज जी को फोन किया और बताया कि यह तो लड़की निकली। महाराज जी बोले, ‘घबराओ नहीं, लड़का कहा था लड़का ही मिलेगा। इस लड़की का अभी लड़का बना देते हैं। तुम फिर चैक कराके देखो।’ थोड़ी देर बाद दूसरी जगह से अल्ट्रासाउन्ड कराया तो लड़का निकला । फिर हमने एक और अलग स्थान से अल्यूसाउन्ड कराया उसने भी लड़का बताया। एक महीना और बीत जाने के बाद फिर से टेस्ट कराया. सभी ने लड़का ही बताया। बच्चा होने के तीन दिन पहले डॉक्टर ने बताया कि पेट का पानी सूख गया है और बच्चा ऊपर चढ़ गया है इसलिए ऑपरेशन करके बच्चा निकालना नितान्त आवश्यक है। मेरी पत्नी ने महाराज जी को फोन किया तो महाराज जी ने कहा घबराओ नहीं, मैं अभी आपके घर आ रहा हूँ। बच्चा बिल्कुल सामान्य ढंग से होगा। महाराज जी ने हमारे घर आकर हमें समझाया कि दो दिन और इंतजार करो। तीसरे दिन मेरी पत्नी को दर्द उठा तो महाराज जी ने फोन पर कहा कि अब अस्पताल जाओ और आज ही सामान्य तरीके से बच्चा हो जायेगा। उसी दिन रात में सामान्य प्रसूति से पुत्र उत्पन्न हुआ। इस प्रकार मेरी तथा अन्नू की इच्छा पूरी हो गई तथा बापू श्रद्धाराम की दया से महाराज अमर सिंह जी का दिया आशीर्वाद फलीभूत हुआ। 

मुकेश नागपाल
बी-5 कीर्तिनगर-दिल्ली
दूरभाष नं0-5434947,
5454947

मोना, पत्नी श्री दीपक कुमार-सेक्टर-8 रोहिणी-दिल्ली-85 फोन नं0-7271596, जब अपनी आवाज बन्द हो जाने पर इलाज कराने 1993 में आश्रम आई, तब महाराज जी से पुत्र की माँग की थी और महाराज जी ने कहा था नौ दिन ओम् मन्दिर ढक्का साहिब में पति पत्नी दोनों जाकर मत्था टेकें तो पुत्र प्राप्ति हो जाएगी। उन्होंने मत्था टेका और वह जल्दी ही गर्भवती हो गई। गुरु महाराज की दया से उन्हें मार्च 1995 में पुत्र की प्राप्ति हो गई। नोट-कई और सैकडों लोगों को महाराज जी के आशीर्वाद से सन्तान की प्राप्ति हुई है। सबका विवरण पुस्तक में देना सम्भव नहीं है ।

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