मेरा पुत्र लक्की गंगा, बहरा, मानसिक रूप से विक्षिप्त तथा मंगोल ।। मैं इलाज के लिए अपने पुत्र को गुरुजी के पास लाया। गुरुजी ने बालक गालों, आँख, सिर तथा कानों पर हाथ फेर कर आशीर्वाद दिया। तीन हीने तक हफ्ते में तीन बार हम अपने बच्चे को गुरुजी के पास ले जाते रहे। अब हमारा बच्चा बिल्कुल ठीक है। वह अब सुन तथा बोल भी सकता है। स्कूल भी जाता है। उसकी मानसिक विक्षिप्तता पूर्णतः समाप्त हो गई है। उसका मस्तिष्क भी विकसित हो गया है।
मेरा पुत्र विष्णु गूंगा, बहरा तथा मानसिक रूप से विश्क्षिप्त था । उसे मैं हफ्ते में दो बार गुरुजी के आश्रम में लेकर आता था। गुरुजी इसके सिर, गाल तथा कानों पर हाथ फेरते थे। ढाई महीने की अवधि में ही मेरा बच्चा सुनने और बोलने लगा । उसके दिमाग का भी काफी हद तक विकास हुआ है। अब तो हमने उसे स्कूल में भी डाल दिया है। वह बहुत अच्छे नंबर तो नहीं ला पाता, मगर फिर भी अपने आपको सम्भालने लायक तो वह हो ही गया है।
विरजु, सुपुत्र-श्री भीमसेन 64-ए लाल क्वार्टर, पंजाबी बाग-दिल्ली