संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

गुरु परम्परा का परिचय

उस परब्रह्म परमेश्वर को गुण, कर्म, स्वभाव से अनेकों नामों से पुकारा जाता है। उन्हीं नामों में से एक नाम ज्योति स्वरूप भी है। संत महात्मा योग- शक्ति से उस ज्योत को प्रगट कर, उस ज्योति स्वरूप के दर्शन करके उसमें विलीन होकर खुद भी ज्योति स्वरूप हो जाते हैं। यह ज्योत कबीर नानक, पानप और बाबा ठाकर जी आदि अनेक रूपों में प्रगट हुई । अलग-अलग स्वरूपों में प्रगट होकर अनेकों दिव्य आत्माओं को प्रकाशित किया। जैसे यही ज्योत जब गुरुनानक में प्रगट हुई तो गुरु गोविन्द सिंह तक पहुँची। हमारी गुरु प्रणाली बाबा ठाकर जी से चली है। बाबा ठाकर जी ने योग द्वारा इस ज्योत को जब प्रगट किया तो बापू ज्वाला सिंह में इसे प्रगट कर श्री ओम नारायण दत्त तथा श्री कल्याण दास जी तक पहुँचाया । श्री ओम् जी महाराज ने इस ज्योत को हरनाम जी महाराज, ठाकर दास जी लाम्बड़े वाले तथा गुसाँई रामलाल जी अमृतसर वालों में योग द्वारा प्रगट किया । क्रमशः यही ज्योत इन महापुरूषों द्वारा अनेक महापुरूषों तक पहुँची, जिसका विवरण निम्नानुसार है।

परमहंस बाबा ठाकर जी दरबार (साधांवाली)

साधांवाली अटारी से दो मील है। अब पाकिस्तान में चला गया है और दरबार बस्ती नीं जालंधर में आ गया है। गुरु परम्परा इस प्रकार है –

1. परमहंस बाबा ठाकर जी महाराज

2. श्रीमान 108 भाग सिंह जी महाराज

3. श्रीमान 108 भगत कन्हैया सिंह जी महाराज

4. श्रीमान 108 बाबा अरूड सिंह जी महाराज

5. श्रीमान 108 बिशनसिंह जी महाराज

6. श्रीमान 108 बाबा हीरा सिंह जी महाराज

7. श्रीमान 108 बाबा खान चन्द जी महाराज

8. श्रीमान 108 संत श्याम दास जी महाराज

परमहंस बाबा ठाकर जी के शिष्य बाबा ज्वाला सिंह जी हुए जिनका दरबार नूरशाह जिला मिन्टगुमरी में था। पाकिस्तान बनने के बाद अब यह दरबार ज्वाला नगर सहारनपुर में है।

दरबार बापू ज्वाला सिंह जी सहारनपुर

1. श्रीमान 108 बाबा ज्वाला सिंह जी महाराज

2. श्रीमान 108 पंडित कल्याण दास जी महाराज

3. श्रीमान 108 पंडित हेमराज जी महाराज

4. श्रीमान 108 महन्त दया किशन जी महाराज

5. श्रीमान 108 महन्त सुभाष जी महाराज

बाबा ज्वालासिंह के शिष्य बाबा भाग सिंह साधांवाली दरबार के और पंडित कल्याण दास जी नूरशाह दरबार के महन्त हुए तथा पंडित नारायण दत्त (ओम्जी) नन्दाचौर वालों ने अपना दरबार नन्दाचौर (होशियारपुर) में स्थापित किया ।

ओम् दरबार-नन्दाचौर

1. श्रीमान 108 पंडित नारायण दत्त ओम् जी महाराज

2. श्रीमान 108 हरनाम जी महाराज

3. श्रीमान 108 संत श्रद्धाराम जी महाराज

4. श्रीमान 108 गुरुदास राम जी महाराज

5. श्रीमान 108 भानुदत्त जी महाराज

6. श्रीमान 108 हरभगवान जी महाराज

पंडित नारायण दत्त ओम् जी महाराज के शिष्य हरनाम जी दरबार नंदाचौर के महन्त हुए। ठाकर दास जी महाराज ने लाम्बड़ा जिला होशियारपुर में दरबार स्थापित किया तथा गोसाँई रामलाल जी महाराज ने अमृतसर में दरबार की स्थापना की

दरबार ठाकर दास जी महाराज लाम्बड़ा

1. श्रीमान 108 ठाकर दास जी महाराज

2. श्रीमान 108 संतराम जी महाराज

3. श्रीमती 108 माता शान्ति स्वरूप जी महाराज

4. श्रीमान 108 करनैल सिंह जी महाराज

5. श्रीमान 108 अमरजीत सिंह जी महाराज

दरबार गोसाँई रामलाल जी महाराज-अमृतसर

1. श्रीमान 108 गोसाँई रामलाल जी महाराज

2. श्रीमान 108 देसराज जी महाराज

3. श्रीमान 108 सतप्रकाश जी महाराज

4. श्रीमान 108 बनवारी जी महाराज

5. श्रीमान 108 प्यारे लाल जी महाराज

ठाकर दास जी महाराज लाम्बड़ा वालों की शिष्या माता देव गिरधारी जी हुए जिनका दरबार दीनानगर बानिया वाली गली-जिला गुरदास पुर में है।

दरबार माता देव गिरधारी जी-दीनानगर

1. श्रीमती 108 माता देव गिरधारी जी 

2. श्रीमान 108 महेन्द्र पाल जी महाराज 

3. श्रीमान 108 हरीशचन्द्र जी महाराज 

श्रीमान 108 स्वामी श्रद्धाराम जी महाराज नन्दाचौर वालों के शिष्य, गुरदास राम जी महाराज नंदाचौर में गद्दी नशीन हुए। उसके पश्चात् भानुदत्त जी महाराज इस गद्दी पर विराजमान हुए। संत महेन्दर सिंह जी महाराज दुरांगला में गद्दीनशीन हुए। ऋषि ठाकर जी महाराज ने हरिपुर खालसा तथा अन्य कई स्थानों पर दरबार स्थापित किये। संत अमर सिंह जी महाराज ने अपने गाँव बूढ़पुर दिल्ली 36 में संत श्रद्धाराम आत्मबोध साधना आश्रम की स्थापना की।

गद्दी ऋषि ठाकरदास जी महाराज हरिपुर खालसा

1. श्रीमान 108 ऋषि ठाकर जी महाराज

2. संत साधुराम जी महाराज

3. संत हरिदास जी महाराज

4. संत गोविन्द दास जी महाराज

5. संत रामदास जी महाराज

संत श्रद्धाराम आत्मबोध साधना आश्रम गाँव बूढ़पुर, दिल्ली-110036

1. संत अमर सिंह जी महाराज 

2. संत सत्यपाल जी महाराज सेवा कर रहे हैं। 

मंदिर परमहंस बाबा ठाकर जी-दुरांगला (जिला गुरदासपुर)

1. स्वामी श्रद्धाराम जी के शिष्य संत महेन्द्र सिंह जी महाराज

2. श्रीमान 108 चमन लाल पुजारा जी महाराज

मंदिर परमहंस बाबा ठाकर जी-रोषा एवम् रामबाग

परमहंस बापूजी का विशाल मंदिर, बगीचा एवम् सरोवर बना हुआ है। यहाँ वैसाखी के दिन हर वर्ष मेला लगता है।

मंदिर ओम् नारायण हरनाम जी महाराज ढक्का, दिल्ली-110009

इस मंदिर का निर्माण श्री मान 108 स्वामी श्रद्धाराम जी ने कराया। इसका संचालन यहाँ की सत्संग सभा करती है। इसके प्रधान बापू जी के परम प्रिय तथा निष्काम सेवी शिष्य श्री कृष्णलाल नागपाल थे। अब ओम् प्रकाश आहूजा मंदिर के प्रधान हैं। श्री हरगु लाल नागपाल अपने पिता जी की तरह बड़े शांत भाव से सैक्रेट्री का कार्य संभालते थे, अब नवयुग तनेजा सैक्रेट्री का कार्य संभालते हैं। चौधरी अविनाश चंद्र (रिटायर्ड डी० सी० पी० देहली पुलिस) श्री ओम् दरबारों के चेयरमैन है। आप बड़ी निष्ठा और लगन के साथ सेवा में लगे हुए है। श्री हर भगवान जग्गा जी जो एक मस्ताने भक्त है. ढक्का मंदिर की सेवा में दिन-रात लगे रहते थे। आजकल श्री ओम् दरबार नंदाचौर में गद्दी नशीन है। दिल्ली तथा आस-पास रहने वाली बापू की संगत बड़ी संख्या में आकर साप्ताहिक तथा अन्य धार्मिक पर्वों पर सत्संग से लाभ उठाती है।

ओम् मन्दिर बापू कल्याण दास जी महाराज गदरपुर (नैनीताल)

महन्त दया किशन जी महाराज ने गदरपुर में बापू कल्याण दास जी महाराज की स्मृति में एवं राम राज में बापू हेमराज जी महाराज की स्मृति में विशाल मंदिर बनवाये, जहाँ बापू जी की संगत पूजा-पाठ तथा सत्संग द्वारा लाभान्वित हो रही है।

बापू दया किशन जी महाराज जी की स्मृति में राठौड़ा जिला मेरठ तथा खड़मासा जिला काशीपुर, उत्तराखण्ड में दो मंदिर बनावाये गये।

श्री ओम् दरबार मेरठ तथा रूद्रपुर

बापू हर भगवान जी महाराज ने बापू गुरदास राम जी की स्मृति में एच-111, शास्त्री नगर, मेरठ में एवम् बापू भानुदत्त जी की स्मृति में खेड़ा कॉलोनी रूद्रपुर में सुंदर मंदिरों का निर्माण करवाया है जहाँ प्रतिदिन संगत दर्शन करके जीवन लाभ उठा रही है।

कनखल (हरिद्वार)

महन्त श्यामदास जी जालन्धर वाले ने परमहंस बापू ठाकर जी महाराज के नाम पर कनखल (हरिद्वार) में भव्य मंदिर का निर्माण करवाया, जो जालन्धर आश्रम के नाम से प्रसिद्ध है।

बाबा पानप देव के स्थान

परम हंस श्री ठाकर जी महाराज पंजाब में प्रगट होने से पहले बाबा पानप देव के रूप में संसार के सामने आये थे। उनके मुख्य स्थान धामपुर हरिद्वार-यू०पी०, डिप्टीगंज-देहली तथा तिजारा-अलवर में हैं। इसके अलावा बाबा जी के अन्य बहुत से शहरों में भी स्थान हैं।

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