संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

बुखार उतरना

मेरा पुत्र चरण कमल सिंह सिधू, उम्र 18 वर्ष, आठ दिन से बुखार से पीडित था। एक दिन रात आठ बजे उसका बुखार 106.4 डिग्री हो गया, हालत नाजुक हो गई बचने की उम्मीद न रही। मेरा एक यही लड़का है। मैं अपने पडोसी मलिन्दर सिंह, जो 61 संदेश बिहार में रहते हैं के पास यह मोचकर गया कि वह मेरे साथ चलकर अपने एक डॉक्टर मित्र को बुलाकर मेरे बेटे को दिखा देवे । मलिन्दर सिंह के घर. मेरे घुसने से तीन चार मिनट पहले ही गुरुजी उनके घर आये थे। मैं गुरुजी को पहले नहीं जानता था। मैंने मलिन्दर सिंह को एक तरफ बुलाकर अपनी बात बताई। वह मेरे साथ जाना भी चाहता था मगर गुरुजी को छोड़कर वह कैसे जाये, यह सोचकर परेशान हो रहा था। फिर उन्होंने मेरे साथ अपने बेटे को जाने को कह दिया। गुरुजी न मलिन्दर सिंह से पूछा क्या बात है? मलिन्दर सिंह ने सारा वृत्तान्त गुरुजी को बताया। गुरुजी ने कहा-डॉक्टर क्या करेगा। सिंधू को बुलाओ। मैं और मलिन्दर सिंह का बेटा घर से बाहर निकल चुके थे तथा कार स्टार्ट ही की थी तभी मलिन्दर सिंह दौड़ता हुआ पहुँचा तथा हमें गुरुजी के पास ले आया। अब चूंकि मैं जान गया था कि ये एक संत हैं, मैंने हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना की कि मेरे बेटे की जान बचाओ। गुरुजी ने कहा, जान को कोई खतरा है ही नहीं, समस्या तो आँखों की है। बच्चे को चेचक निकली है तथा उसे भाग्यानुसार इस बिमारी में अन्धा हो जाना है और अन्धा रहकर ही जीवन-यापन करना है। “थोड़ी देर गुरुजी आँखें बन्द करके बैठे, फिर बोले, तेरे बेटे की अरदास कर दी है। अब वह अन्धा भी नहीं होगा, किस्मत बदल दी है। उसका बुखार 2.4 डिग्री कम कर दिया है, अपने घर जाकर चैक करो। अब उसका बुखार 104 डिग्री है।” मैंने घर जाकर चैक किया तो बुखार 104 डिग्री ही निकला । अब मुझे कुछ आशा बनी तथा गुरु जी के पास आकर बताया । गुरुजी बोले तुम बैठ कर चाय पीओ, फिर उसका बुखार और दो डिग्री उतार देंगे। चाय के बाद गुरुजी ने कहा-चैक करके आओ अब बुखार 102 डिग्री कर दिया है। मैंने बुखार चैक किया तो 102 डिग्री ही मिला। गुरुजी ने कहा- तुम अपने घर जाओ, हम खाना खाने के बाद तुम्हारे घर आयेंगे तथा बुखार 100 डिग्री कर देंगे। गुरुजी छाने के बाद मेरे घर के दरवाजे आकर खड़े हो गये, अन्दर नहीं आये। वहीं खड़े-खड़े बोले- बच्चे से पूछो अब क्या हाल है और वह जो कहे मुझे बताओं। बच्चे ने कहा कि उसके सिर में भयंकर दर्द है तथा आँखों से आग निकल रही है। लड़का पिछले तीन दिनों से एक मिनट के लिए भी नहीं सोया था। गुरुजी ने वहीं से उसका सिर दर्द तथा आँखों से निकलने वाली आग शान्त कर दी तथा बुखार 100.2 डिग्री कर दिया और बोले अब इसे सुला देते हैं और बच्चा सचमुच ही सो गया, सात घंटे बाद उठा । चलते समय गुरुजी ने बोला कि कल सुबह इसके शरीर पर चेचक खूब निकली होगी लेकिन तकलीफ कतई न होगी। इक्कीस दिन के बाद आश्रम लाकर मत्था टिका देना। जैसा गुरुजी ने कहा था वैसा ही हुआ। मैं समझता हूँ कि सच्चे बादशाह ने खुद मेरे घर आकर मेरे कष्टों को हर लिया। 

कमल कमलेश सिंह सिंधू 42 सन्देश बिहार, देहली-110034
फोन, नं0-7187310

मैं संजय, अपनी बहन रेणु को इलाज के लिए गुरुजी के आश्रम में ले जाया करता था। एक दिन मुझे 103 डिग्री बुखार हो गया, तथा बहन को आश्रम में ले जाने के लिए असमर्थ था। मेरी बहन ने गुरुजी से फोन पर आग्रह किया कि वे उसकी दवाई का नाम बता दें, ताकि वह बाजार से दवा खरीद कर खा सके । उसने गुरुजी से कहा कि भैया का बुखार उतर जाने पर वह आश्रम आ जायेगी । गुरुजी ने कहा कि हमारी दवा बाजार में नहीं मिलती है। भैया का बुखार अभी उतार देते हैं, टेलीफोन उसे दे दो। गुरुजी ने मुझे आँखें बंद करने के लिए कहा और थोड़ी देर बाद कहा कि अब बुखार उतर गया है। चैक करने पर देखा, तो सचमुच बुखार उतर गया था । फिर मैं अपनी बहन को इलाज के लिए आश्रम ले गया।

संजय, सुपुत्र श्री चन्द्रमोहन मकान नं-जी-105 विकासपुर-दिल्ली

मैं राजेश, मुझे 102 डिग्री बुखार था। मैंने गुरुजी को फोन पर अपनी परेशानी बताई। गुरुजी ने मुझे आँखें बंद करने के लिए कहा। फिर एक मिनट बाद बोले, देखो तुम्हारा बुखार उतर गया है चैक करके बताओ। मैंन पास ही की एक डॉक्टर की दुकान से बुखार चेक करवा कर देखा । वास्तव में ही मेरा बुखार उतर गया था। गुरुजी के इस चमत्कारिक आशीर्वाद के लिए मैं कृतज्ञता प्रगट करने उनके आश्रम में गया और मत्था टेका।

राजेश तनेजा
मकान नं0-आर-224, वाणी विहार
उत्तम नगर-दिल्ली

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