बाबा पानपदेव का जन्म विक्रमी संवत् 1776 में भाट जाति में बीरबल के कुल में हुआ था। जब आप छह महीने के थे. तो आपके माँ-बाप आपको एक वृक्ष के नीचे सुलाकर काम करने चले गये। वहाँ से निःसन्तान दम्पति गुजर रहे थे, उन्होंने बालक को देखा और वे उसे अपने साथ लेकर अपने घर चले गये। वे जाति के राजमिस्त्री थे। आपका पालन-पोषण इसी परिवार में हुआ । तेरह वर्ष की अवस्था में ही आपने राजगिरी का काम आरम्भ किया । आपके गुरु श्री मगनी राम जी तिजारा अलवर में रहते थे, जिन्होंने आपको योग-युक्ति सिखाकर आत्मज्ञानी बना दिया । आप कुछ दिन दिल्ली रहकर फिर धामपुर (उत्तर-प्रदेश) में चले गये और वहीं पर जीवन पर्यन्त रहे। आपका जीवन चमत्कारों से भरा था। आपने अनेक लोगों को आत्मज्ञान देकर दिव्य बनाया। चोला छोड़ने से पहले आपने कहा था कि अब हम पंजाब में ठाकर का रूप धारण करके बारह वर्ष की अवस्था में प्रगट हो रहे हैं। हमारी गुरु प्रणाली बाबा ठाकर जी से चली है। इसलिए यह संक्षिप्त सा परिचय देना उचित समझा गया । आपकी वाणी एक साधारण जीवन से लेकर जीव को ब्रह्म बना देने वाली शिक्षा से भरी है।