संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

बहरापन दूर करना

मैं अनिल शर्मा, उम्र 36 वर्ष 15 अगस्त 1992 को सोते समय मेरे दोनों कानों में भयंकर दर्द हुआ। डॉक्टर ने दो बार रात में बेहोशी की सुइयाँ लगाई, तब जाकर रात कटी। सुबह डॉक्टर ने जाँच करके बताया कि दोनों कानों के परदे खत्म हो गये हैं और मैं जीवन भर सुन नहीं सकता। मेरे घर बाले मुझे पटेल नगर में डाक्टर के0के0 कक्कड़, जो कि कान के विशेषज्ञ हैं. के पास ले गये। डॉक्टर कक्कड़ ने भी बताया कि मैं आजीवन सुन नहीं सकता और इसका कोई इलाज नहीं है। फिर मुझे आल इण्डिया मेडिकल अस्पताल देहली में भर्ती कराया गया। वहाँ डेढ महीने इलाज चला जिससे मेरे कान की भयंकर पीड़ा तो समाप्त हो गई मगर वहाँ भी डॉक्टरों ने कहा कि मैं जीवन भर सुन नहीं सकूंगा। मैं एक बहरे आदमी का जीवन बड़ी निराश अवस्था में जी रहा था। एक दिन मेरे एक रिश्तेदार जनवरी 1993 में मुझे पूज्य गुरुजी कर्नल अमर सिंह जी महाराज के पास ले गये और उन्हें पूरी कहानी बताई तथा आल इण्डिया मेडिकल अस्पताल के पेपर भी दिखाए। गुरुजी ने कहा हम नये परदे बनायेंगे और यह आदमी 7 दिन में सुनने लगेगा यानि बिल्कुल ठीक हो जायेगा। मैं रोज उनके पास जाता था, वह रोज मेरे कानों पर हाथ घुमाते थे। उन्होंने मुझे कोई दवा नहीं दी। मैं पाँचवे दिन सुनने लग गया। सात दिन में मैं बिल्कुल ठीक हो गया। मुझे पूज्य कर्नल साहब के आशीर्वाद तथा कृपा से एक नया जीवन मिल गया । मेरे लिए तो पूज्य गुरु जी साक्षात भगवान हैं।

अनिल शर्मा
निवास-डी. 173 कमला नगर दिल्ली
फोन नं0-2934469

मैं करूणा मोंगा 36 वर्ष, मुझे डेढ़ वर्ष की अवस्था में टाईफाइड हुआ था और मेरे कानों की सुनने की शक्ति खत्म हो गई। मुझे स्पीच थैरेपी दिलाई गई। मैं होठों को देखकर समझ लेती थी कि दूसरे आदमी ने क्या बोला है और मैं उससे बात कर लेती थी। मेरा भाई एक दिन मुझे पूज्य गुरुजी के पास श्रद्धाराम आश्रम, बूढ़पुर दिल्ली ले गया। वहाँ गुरुजी ने मेरे कानों पर अपना हाथ घुमाया तब मुझे थोड़ा बहुत सुनने लगा। मैं करीब दस बार गुरुजी के पास इलाज के लिए गई, हर बार मुझे पहली बार से ज्यादा सुनाई देने लगा । अब मैं बिल्कुल ठीक सुन पा रही हूँ। गुरुजी ने मुझे कोई दवा नहीं दी और कहा कि यह सब बापूजी ( उनके गुरु) के आशीर्वाद से हुआ है। कुछ भी हो में पूज्य कर्नल अमर सिंह जी महाराज की कृपा के लिए आभारी रहूँगी। मेरे लिए तो वे परमात्मा का रूप हैं। 

श्रीमती करूणा मोंगा
निवासी-सी-4/25 सी लारेन्स रोड
दिल्ली-35

मैं रेणू, उम्र 18 वर्ष जन्म से बोल और सुन नहीं सकती थी। मेरे भाई के दोस्त ने हमें संत श्रद्धाराम आश्रम बूढ़पुर दिल्ली-36 में कर्नल अमर सिंह जी महाराज के पास जाने के लिए प्रेरित किया। हम वहाँ गये और महाराज ने मेरे कानों पर थपकियाँ दी। मुझे उसी समय थोड़ा-थोड़ा सुनाई देने लगा। मैं अपने भाई के साथ 21 बार महाराज जी के पास गई। हर बार मुझे अधिक लाभ होता गया। अब महाराज की कृपा से मैं बोल भी सकती हूँ और सुन भी सकती हूँ। मुझसे कोई पैसा नहीं लिया गया। केवल 21 बार संत श्रद्धाराम जी के मन्दिर में मत्था टेकने के लिये बोला। उन्होंने कहा कि यह तपस्या है, करो । मैं आज संत श्रद्धाराम और कर्नल महाराज के आशीर्वाद से ठीक हूँ। यह बिल्कुल सत्य है कि संतों का जन्म लेना जग कल्याण के लिए ही होता है।

कुमारी रेणु
सुपुत्री श्री सूबेदार मेजर रघुनाथ सिंह
निवासी-WZ-66, लाजवन्ती गार्डन
गली नं0-9, नई दिल्ली-46.

मैं सुशील गोयल उम्र 21 वर्ष, बोल तथा सुन नहीं सकता था। बचपन में मुझे टाईफाईड हुआ था। उसके बाद मेरा सुनना तथा बोलना बन्द हो गया। मेरे मौसा जी श्री जगदीश लाल जी ने मुझे सब जगह दिखाने के बाद हार कर आल इण्डिया मेडिकल अस्पताल में दिखाया। वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि मेरे कानों और गले का ऑपरेशन करना पडेगा तो मैं ठीक हो सकता है। मेरे मौसाजी ने मेरा ऑपरेशन तो नहीं कराया और आश्रम में ले आये। यहाँ पर आया तो महाराजा जी ने मेरे कानों पर थपकियाँ लगाई और सले पर हाथ फेरा। मैं उसी समय सुनने और बोलने लग गया। यह सब भगवान तथा गुरु महाराज जी के आशीर्वाद से हुआ है। मैं उनका आभारी हूँ.

सुशील गोयल, पुत्र भानूराम

गाँव लौन, डा० लौन जिला-जिन्द हरियाणा

मेरी बेटी आशा 36 वर्ष की उम्र में बहरी हो गई। तीन महीनों तक डॉक्टरों से इलाज कराया परन्तु कोई आराम नहीं आया और वहाँ के डॉक्टरों ने यहाँ तक कह दिया कि इसका कोई भी इलाज सम्भव नहीं है। मैं उसे संत श्रद्धाराम आश्रम में लेकर आयी। बाबा जी ने तीन बार मेरी बेटी के कानों पर थपकियाँ दी और उसे सुनाई देने लगा। अब वह बिल्कुल ठीक है। महाराज जी ने न तो उसे कोई दवा दी और न ही कोई पैसा ही लिया। एक दिन छोड़ कर, मैं सात बार महाराज जी के पास उसे लेकर गई। बाबाजी ने केवल अपने आशीर्वाद से ही उसे ठीक कर दिया। परमात्मा करें बाबा अमर सिंह जी हजारों साल जियें और दुःखी संसार के दुःख दूर करते रहें।

श्रीमती प‌द्मादेवी
पत्नी, श्री जयप्रकाश बंसल
सी-52 हरिनगर घन्टाघर
नई दिल्ली-110064

मैं बलवन्त सिंह, सन्त श्रद्धाराम आत्मबोध साधना आश्रम में जब कान के इलाज के लिए गया, तब मेरे कान में सुनने के लिए मशीन लगी हुई थी। पहले ही दिन उपचार के बाद मुझे मशीन हटाने के लिए कह दिया गया। मशीन उतार देने के बाद मैंने महसूस किया मैं उतना ही सुन पा रहा हूँ जितना मशीन लगाने पर सुनता था। दूसरी और तीसरी बार के उपचार के बाद सुनने में सुधार कुछ अधिक होता गया। पाँच बार उपचार के बाद अब मैं बिल्कुल ठीक है। मेरे एक साथी को भी कम सुनने की शिकायत थी। वह भी मेरे साथ आश्रम जाता था. उसका भी गुरुजी ने उपचार किया और वह भी ठीक हो गया है। में महाराज जी का बहुत आभारी है। यह उपचार बिना दवा के ही किया गया तथा गुरुजी ने कोई पैसा धेला हमसे नहीं लिया। 

बलवन्त सिंह
X/966, चाँद मोहल्ला
गान्धी नगर दिल्ली-110031

मेरे पुत्र श्रीकान्त की उम्र 15 साल है। वह जन्म से ही बोल और सुन नहीं सकता था। मैंने उसका सभी जगह इलाज कराया, मगर कोई आराम नहीं मिला। वह मेरी एक मात्र औलाद है और परमात्मा की कृपा से मेरो आर्थिक स्थिति अच्छी है, इसलिए इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी। 1994 में दिल्ली में ई.एन.टी. विशेषज्ञों का सेमिनार हुआ। मेरे पुत्र श्रीकान्त का केस भी इसी सेमिनार में प्रस्तुत किया गया। स्पेन देश के एक डॉक्टर ने श्रीकान्त की जाँच की। जाँच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि यह सुन तो नहीं सकता पर स्पीच थैरेपी से बोलने लगेगा और होठों की हरकत से दूसरे आदमी की बात समझने लग जाएगा। मैं वहाँ से लौटा तो बहुत निराश था और वापिस जाने के लिए बस स्टैण्ड पर खड़ा था। तब मुझे एक सज्जन ने संत श्रद्धाराम आश्रम का पता बताया और मैं बच्चे को लेकर आश्रम में पहुँचा। महाराज जी के पैर पकड़कर मैं बहुत रोया और कहा कि मैं दुनिया से निराश हो चुका हूँ मुझे यहाँ से निराश मत भेजना। महाराज जी ने कहा- तुम मन्दिर में जाकर खुद अपनी अरदास करो फिर मेरे पास आओ। मैंने मन्दिर में मत्था टेका और अरदास की. फिर महाराज जी ने श्रीकांत के कानों पर थपकियाँ दी। श्रीकान्त कुछ सुनने लगा। मैं श्रीकान्त को सात दिन तक आश्रम में लेकर आता रहा, अब वह पूरी तरह संनने लग गया और तुतलाते हुए टूटे-फूटे शब्दों में कुछ बोलने भी लग गया। महाराज जी ने इसके बाद मुझे अपने घर केरल जाने की अनुमति देते हुए कहा कि बच्चा अब पूरी तरह ठीक हो गया है। थोडे ही दिन के अभ्यास से यह पूरी तरह से बोलने भी लग जाएगा।

सी०वी० सुन्दरम्
निवासी-पुभानवोथिल
पोस्टआफिस ओलकेपी अमपालम
मावेलीकारा, जिला-आलेप्पी, केरल-690510

मेरे जीजाजी श्री राजेश जी, निवासी आर-224 वाणी विहार, उत्तम नगर दिल्ली से मेरे घर आए हुए थे। वे करीब एक सप्ताह से सुन नहीं पा रहे थे। कान में ऊँची आवाज देने पर भी उन्हें सुनाई नहीं पड़ता था । ई.एन. टी. स्पेश्लिस्ट से उनका इलाज भी कराया परन्तु कोई फर्क नहीं पड़ा। सभी डॉक्टर उन्हें ऑपरेशन के लिए कह रहे थे। मैंने टेलीफोन पर महाराज अमर सिंह जी से बात की कि मैं अपने जीजाजी को आपके पास लाना चाहता हूँ, कृपया आप बतायें कि मैं उन्हें किस समय लाऊँ। महाराज जी ने कहा “लाने की कोई जरूरत नहीं है, बापू के आशीर्वाद से अभी ठीक हो जायेगा।” एक मिनिट के बाद महाराज जी ने फोन पर मुझसे कहा कि राजेश ठीक हो गया है, देखो उसको सुन रहा है या नहीं। फिर फोन पर राजेश की महाराज जी से बात कराई। दो दिन बाद राजेश को लेकर मैं संत श्रद्धाराम आश्रम बूढ़पुर में गया। इस चमत्कारिक उपचार के लिए आभार प्रकट करते हुए महाराज को मत्था टेका और आशीर्वाद लिया।

विनोद
मकान न0 98, साईट-1
विकासपुरी, रोड, दिल्ली
फोन नं0-5520632

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