संत श्रद्धाराम आत्म-बोध साधना आश्रम

कहीं भी प्रकट होकर भक्तों के कष्ट को दूर करना

11 जून 1995 को मेरे पति श्री नन्दलाल को बाँये कंधे में दर्द हो रहा था। मैंने महाराज जी को फोन किया कि मेरे पति को झाड़ा कर दो ताकि दर्द खत्म हो जाये । महाराज जी ने कहा, “इसको दिल की तकलीफ हो रही है फौरन अस्ताल ले जाओ, मैं भी कुछ कर रहा हूँ, घबराना नहीं।” मैं तुरन्त इन्हें राम मनोहर अस्पताल ले गई। डॉक्टरों ने उसे हृदय रोग वार्ड के आई०सी०यू० (इन्टेन्सिव केयर यूनिट) में डाल दिया। मैंने महाराज जी को अस्पताल से फोन किया, कि मैं इन्हें अकेली कैसे संभालूँ, आप ही इन्हें संभालो महाराज जी ने कहा, “घबरा मत, मैं भी वहीं पर तुम्हारे साथ हूँ।” मेरे पति को काफी राहत तो मिल गई लेकिन वह सो नहीं पा रहे थे। मेरे पति ने कहा कि यदि महाराज जी एक बार यहाँ आ जाते तो कुछ कर देते । इतने में महाराज जी वहाँ प्रगट हो गये और बोले “घबराओ मत। मैं सारी रात तुम्हारे साथ यही रहूँगा ।” इतना कहकर लुप्त हो गये। मैं तथा मेरे पति दोनों ने दर्शन किये और जो कुछ कहा वह भी दोनों ने सुना । इसी प्रकार पूरी रात में ग्यारह बार महाराज जी ने प्रगट होकर हम पति और पत्नी दोनों को दर्शन दिये तथा बातें करके सांत्वना दी।

शकुन्तला, धर्मपत्नी श्री नन्दलाल
63 ए/414, लाल क्र्वाटर, पंजाबी बाग
नई दिल्ली-110026
दूरभाष नं0-5422567

मैं एक रात को सोया पड़ा था। संत अमर सिंह जी महाराज ने मुझे जगाया और बोले, “तेरे सिर पर मौत मंडरा रही है। ग्यारह दिन मन्दिर संत श्रद्धाराम आत्मबोध साधना आश्रम-बूढ़पुर में माथा टेको, संकट टल जायेगा।” मैंने सोचा यह सपना है, और सपने में कुछ भी दिखाई दे जाता है, इसलिए माथा टेकने नहीं आया। चौथे दिन फिर महाराज जी ने मुझे चाँटा मार कर जगाया और कहा “सपना मत समझ यदि तूने कल से माथा टेकना शुरू नहीं किया तो कल शाम छह बजे तक तेरी मौत दुर्घटना (एक्सीडेन्ट) से हो जायेगी।” मैंने फिर सपना समझा, उठकर बैठ गया लेकिन फिर भी महाराज जी को सामने खड़े हुए देखा। मैंने सोचा अभी नींद का असर है। मैं खड़ा होकर कमरे में टहलने लगा, फिर भी महाराज जी को सामने खड़ा पाया। फिर महाराज जी ने कहा, “संशय मत कर और माथा टेक, मैं साक्षात तेरे समक्ष खड़ा हूँ।” अगले दिन सुबह मैं माथा टेकने आया और महाराज जी को सारी कहानी बताई। महाराज जी ने कहा, “मौत तो टल गई लेकिन एक्सिडेन्ट लगातार छह दिन तक जरूर होंगे। आज का एक्सिडेन्ट सबसे खतरनाक है। बाकी तो छोटे-मोटे रहेंगे। घबराना नहीं, बापू जी रक्षा करेंगे।” उसी दिन मेरा स्कूटर का एक्सिडेन्ट हुआ, जिसमें मैं आधे घन्टे बेहोश रहा । हेलमेट टूट गया, तथा स्कूटर का मड़गार्ड और फ्रन्ट फुट गार्ड भी टूट गया लेकिन बापू जी की कृपा से मैं होश आने के बाद बिल्कुल सही सलामत रहा। जैसे महाराज जी ने कहा था, पाँच दिन और छोटे मोटे एक्सिडेन्ट रोजाना होते रहे पर मुझे कोई बड़ी चोट नहीं आई ।

प्रेम चन्द ‘कालकी’
सी-7/28 लॉरेन्स रोड़, दिल्ली-110035

मैं प्रसूति के लिए नर्सिंग होम में भर्ती थी। बच्चा ऑपरेशन से हुआ। जब ऑपरेशन हुआ तब मैं घबरा रही थी, और महाराज अमर सिंह जी को मन ही मन में याद कर रही थी। महाराज जी ने साक्षात् प्रगट होकर मुझे बोला, “घबरा नहीं, कुछ नही होगा, मैं तेरे साथ खड़ा हूँ” जब तक ऑपरेशन होता रहा, महाराज जी मेरे पास ही खड़े रहे, उसके बाद अन्तर्ध्यान हो गये।

संगीता, धर्मपत्नी मनोज पाहवा मकान न0 1358, सेक्टर-37-नौएडा जिला-गाजियाबाद (उ०प्र०)

मेरे कन्धे में चोट लगने के कारण बहुत ज्यादा दर्द रहता था जो कि सर्दियों में बहुत अधिक होता था। मेरे माता जी ने कहा कि गुरुजी के पास चले जाओ। मैंने सोचा कि मैं कल चला जाऊँगा। उसी दिन रात को जब मैं सोया तो सुबह चार बजे के लगभग गुरुजी आये और बोले क्या तकलीफ है? मैंने कहा मेरे कंधे में दर्द रहता है, तो कन्धे पर हाथ लगाकर बोले, ठीक हो गया है। फिर गायब हो गये। उसके बाद आज तक मेरे कंधे में दर्द नहीं हुआ।

विजय अरोड़ा
मकान न0-777 सेक्टर-23, फरिदाबाद (हरियाणा)

मेरे कन्धे में चोट लगने के कारण बहुत ज्यादा दर्द रहता था जो कि सर्दियों में बहुत अधिक होता था। मेरे माता जी ने कहा कि गुरुजी के पास चले जाओ। मैंने सोचा कि मैं कल चला जाऊँगा। उसी दिन रात को जब मैं सोया तो सुबह चार बजे के लगभग गुरुजी आये और बोले क्या तकलीफ है? मैंने कहा मेरे कंधे में दर्द रहता है, तो कन्धे पर हाथ लगाकर बोले, ठीक हो गया है। फिर गायब हो गये। उसके बाद आज तक मेरे कंधे में दर्द नहीं हुआ।

विजय अरोड़ा
मकान न0-777 सेक्टर-23, फरिदाबाद (हरियाणा)

मेरी बेटी को लड़का हुआ था और मैं उसके पास नर्सिंग होम में गई हुई थी। मेरे दिल में विचार आया कि न जाने बच्चा कैसी किस्मत वाला है। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि अमर सिंह जी महाराज नर्स की टेबिल पर बैठे कुछ लिख रहे हैं। मैंने पूछा कि महाराज जी क्या लिख रहे हो? तो महाराज जी ने कहा, “बच्चे की किस्मत लिख रहा हूँ।” मैं दौड़कर अपनी बेटी के पास गई तथा उसे बताया कि महाराज जी आये हैं, मैं उनको अन्दर लाती हूँ। जब मैं बाहर आई तो देखा कि महाराज जी गायब हो गये थे।

उर्मिला
धर्मपत्नी श्री मोहन लाल
के0 यू0-161 प्रीतमपुरा
नई दिल्ली-110034

मैं ट्रेनिंग पर चन्दौसी गया हुआ था । महाराज जी ने मुझे सपने में दर्शन दिये और कहा, तेरे घर चोर घुसे हैं। फिर बोले, “अरे तू इतनी दूर से क्या कर सकता है, उनको मैं ही सम्भालता हूँ।” इतना कहकर महाराज जी अन्तर्ध्यान हो गये । जब मैं घर आया तो देखा वास्तव में मेरे घर में ग्रील काटकर और ऊपर का दरवाजा तोड़कर चोर घुसे थे। घर का सारा सामान तितर-बितर पड़ा था लेकिन महाराज की दया से एक पैसे का भी माल घर से बाहर नहीं गया। 

गजमोहन गौतम
मकान न0 01/5 फेस-1
बुद्ध बिहार-दिल्ली

7. मैं एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता हूँ। मैं मुद्दत से एक ही तनख्वाह पर काम कर रहा था। मेरा मालिक तनख्वाह बढ़ा ही नहीं रहा था। मैंने एक दिन नौकरी छोड़ने का निश्चय किया तथा अपनी माता जी को भी कह दिया। मेरी माता जी ने मेरे जीजा जी से कहा कि वह मुझे समझाये। मेरे जीजाजी ने महाराज अमर सिंह जी को कह दिया। महाराज जी ने मेरे जीजाजी को बताया कि हम अपने आप समझा देंगे, तुम चिन्ता छोड़ो । अगले दिन सुबह छह बजे महाराज जी ने मुझे मेरे सोने वाले कमरे में साक्षात् दर्शन दिये और बोले, “नौकरी मत छोड़ना, आज से तेरी तनख्वाह तीन सौ रूपये बढ़ा दी है। कुछ दिन बाद और बढ़ा देंगे।” महाराज जी जब मेरे घर से निकल रहे थे तो मेरी माता जी ने भी देखा और बोली महाराज जी यहाँ बैठो, लेकिन महाराज जी यह कहकर कि हम तेरे लड़के की तनख्वाह बढ़ाने आये थे, अब जाते हैं और लोप हो गये।
जब मैं ड्यूटी पर गया तो मेरे मालिक ने मुझे बुलाकर कहा, “आज से तेरी तनख्वाह तीन सौ रूपये बढ़ा दी है।” जहाँ मुझे तनख्वाह बढ़ने की खुशी हो रही थी, वहीं पर मैं महाराज जी की कृपा तथा चमत्कार से भी अचम्भित हो रहा था। अब छह महीने बाद दीवाली पर फिर मेरे मालिक ने सौ रूपये अपने आप ही मेरी तनख्वाह में बढ़ा दिये ।

विजय अरोड़ा
मकान न0777, सैक्टर-23 फरीदाबाद

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