मुझे ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया था और ढाई सालों से अपने पिता के घर पर रह रही थी। एक दिन मैं अपनी माँ के साथ गुरुजी से मिली और उन्हें अपना दुःख बताया। गुरुजी ने कहा सात दिन के भीतर तेरे पति तुझे लेने आयेंगे मगर तुम उसके साथ मत जाना। उसे कहना कि वह अपने पिता को साथ लेकर आये। ससुर के साथ सारी बातें तय करके ही जाना। मैंने कहा मेरे ससुर तो कभी नहीं आयेंगे। गुरुजी ने कहा “मैं जो कहता हूँ, वैसा ही करो। तेरे ससुर को तेरे पति के लौट जाने के तीन दिन के अन्दर ही आना पड़ेगा ।” सभी कुछ वैसे ही हुआ जैसे गुरुजी ने कहा था। अब मैं एक साल से अपनी ससुराल में हूँ और एक खुशहाल जिन्दगी बिता रही हूँ। नोट-किसी विशेष कारण से लड़की, लड़की के माँ-बाप तथा ससुराल का पता नहीं दिया जा रहा है। लड़की का लिखा पत्र आश्रम में रखा है।