मैं अंजली कुंडू, सितंबर 1992 में गुर्दे की तकलीफ के कारण अस्पताल में दाखिल थी। मेरे दाएँ गुर्दे में पत्थर था। बाँया गुर्दा डैड हो चुका था और काम नहीं कर रहा था। आर्मी अस्पताल के डॉक्टरों ने बाँए गुर्दे को निकाल देने का फैसला किया था। मैंने गुरुजी को सारी बात बताकर उनसे प्रार्थना की कि वे मुझे इस कष्ट से मुक्ति दिलाएँ। उन्होंने कहा कि, “तेरा गुर्दा मैंने चालू कर दिया है, अब ऑपरेशन नहीं होगा। तुम डॉक्टरों से कहना कि एक बार फिर से अल्ट्रा साउन्ड कर लें।” डॉक्टरों ने दुबारा अल्ट्रा साउन्ड करने से मना कर दिया और तीन दिन तक ऑपरेशन के लिये तैयार करते रहे । मगर ईश्वर की कृपा से किसी न किसी कारण से ऑपरेशन टलता रहा। चौथे दिन चीफ कंसल्टेंट इन सर्जरी मेजर जनरल सरकार ने सभी पेंडिंग पड़े सर्जरी के केस देखे । उन्होंने कहा कि इसका फिर से अल्ट्रा साउन्ड करके देख लेते हैं। जब दोबारा अल्ट्रा-साउन्ड किया गया, तो सभी डॉक्टर हैरान रह गए क्योंकि बाँया गुर्दा काम कर रहा था, मगर उसका आकार छोटा हो गया था । जनरल सरकार ने कहा कि दाएँ गुर्दे में पथरी का ऑपरेशन करना, क्योंकि बाँया तो ठीक काम कर रहा है। गुरुजी ने कहा कि. “दाँये गुर्दे का तो ऑपरेशन करवा लो क्योंकि पत्थर का साईज काफी बडा है। बाँये गर्दे के आकार को मैं योग शक्ति द्वारा नार्मल साईज का कर दूँगा।” दिसम्बर 1992 में मैंने फिर अल्ट्रा साउन्ड करवाया, तो सचमुच बाँए गुर्दे का आकार नार्मल हो गया था। दाँए गुर्दे का ऑपरेशन पथरी के लिए जनवरी 1993 में कर दिया गया और अब मैं बिल्कुल ठीक हैं।
अंजली कुन्डू वेलफेयर अफसर आर्मी अस्पताल-दिल्ली कैन्ट-110010