मैं रामप्रसाद अपनी गर्दन में दर्द का इलाज करवाने के लिए गुरुजी के पास गया था । मुझे माँस तथा शराब के सेवन की आदत थी। गुरुजी ने कहा कि तुम तो मेरे शिष्य बनोगे। हमारे शिष्य को मांस तथा शराब का सेवन नहीं करना चाहिये। इसीलिए आज के बाद तुम प्रयत्न करने के बाद भी इन चीजों का सेवन नहीं कर पाओगे। “अब मैं तुम्हारे भीतर इन चीजों के प्रति घृणा के भाव पैदा कर रहा हूँ।” इस बात को ढाई साल बीत गए हैं, इन चीजों का न तो मैंने सेवन ही किया है और न ही इच्छा पैदा हुई है। मेरे परिवार वालों ने भी इन चीजों का सेवन छोड़ दिया है। यह सब गुरुजी की कृपा के फलस्वरूप हुआ है।
रामप्रसाद बी-224 मंगोलपुरी-दिल्ली-83
मुझे शराब पीने की लत थी। मैं हर वक्त नशे में पागल सा रहता था। मेरा घर-बार सब उजड़ गया था। मैं चाहकर भी शराब छोड नहीं पा रहा था। किसी ने मेरी माताजी को बुढपुर आश्रम के बारे में बताया। मेरी माँ तथा पत्नी मुझे बूढ़पुर आश्रम में ले गई। महाराज जी ने मुझसे मत्था अपने मन्दिर में टिकवाया और आशीर्वाद दिया कि शराब पन्द्रह दिन बाद छूट जायेगी। मेरी माता से गुरुजी ने कहा कि परसों इसका फोटो लेकर आना। तीसरे दिन फिर आश्रम आये तो गुरुजी ने फोटो के पीछे कुछ लिखा और मेरी पत्नी को देकर कहा कि इसे सात दिन उल्टा रखना है, फिर आठवें दिन उठाकर कहीं भी रखना । आठवें दिन फोटो उठाने के बाद से आज तक मुझे शराब की इच्छा नहीं हुई बल्कि देखने मात्र से नफरत होने लगी है। अब मैंने काफी समय से शराब नहीं पी है। मैं अब काम धन्धा भी करने लगा हूँ तथा अपने परिवार की देखभाल कर रहा हूँ। गुरुजी की मेहरबानी से मेरा जीवन सुधर गया है। मैं उनका सदा ही अहसानमन्द रहूँगा।
जोगिन्दर कुमार मकान नं0-172, मोहल्ला-कलान सोनीपत, हरियाणा