मेरी आवाज बिल्कुल बन्द हो गई थी। मैंने गले के विशेषज्ञों से इलाज कराया मगर कोई फायदा नहीं हुआ। बहुत पैसे भी खर्च हो गये और मैं कर्जदार हो गया। हार कर मैं दिल्ली इलाज के लिए आया और यहाँ पर अपने रिश्तेदारों के पास मकान नं0 336, चोपाल वाली गली, शालीमार गाँव में ठहरा। यहाँ भी न तो डॉक्टरों ने कोई बीमारी पकड़ी न ही मुझे कोई आराम दे पाये । 16 जुलाई 1994 को किसी ने मुझे संत श्रद्धाराम आश्रम, बूढ़पुर जाने की सलाह दी। मैं यहाँ 17.7.94 को महाराज जी से मिला । महाराज जी ने मेरे गले में अपना सीधा हाथ कई बार घुमाया और मुझे बाबा बोलने को कहा। मेरे मुँह से फौरन और साफ ‘बाबा’ शब्द निकल पड़ा। मैं खुशी से पागल सा हो गया और कई बार ‘बाबा-बाबा’ कह गया। फिर न जाने क्यों मुझे रोना आ गया । बाबा जी ने मेरी पूरी कहानी पूछी तो मैंने अपनी बीमारी की पूरी कहानी फटाफट सुना दी, मुझे कोई दिक्क्त बोलने में न हुई। अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। महाराज जी ने मुझे तीन दिन मंदिर में मत्था टेकने के लिए कहा। आज तीसरे दिन मत्था टेका है और महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया है। अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। महाराज जी को तथा संत महात्माओं को मेरा बार-बार नमस्कार।
मुन्ना लाल, पुत्र श्री नन्द किशोर गाँव-डडिश्वरी, डॉ० डडिश्वरी तहसील-सिकन्दराराव जिला-अलीगढ़ (उत्तरप्रदेश)
मेरी शादी श्री दीपक कुमार पुत्र श्री वेद प्रकाश पुंच्छी से डेढ़ साल पहले हुई थी । सन् 1993 में अचानक मेरी आवाज जाती रही। बहुत प्रयत्न करने पर भी मेरे गले से कोई आवाज नहीं निकली। सास-ससुर ने अच्छे से अच्छे डॉक्टरों को दिखाया, इलाज भी कराया मगर कोई फायदा नहीं हुआ। महीने बाद मेरे सास-ससुर को संत श्रद्धाराम आश्रम का पता लगा । मैं अपनी सास और पति के साथ आश्रम में आई। महाराज जी ने मेरे गले पर अपना हाथ फिराया और कहा कि ‘ओउम्’ बोलो। मैंने ओउम् शब्द बिल्कुल ठीक बोला। फिर महाराज जी ने कई और शब्द भी बुलवाए। मैं बोलने लग गई और मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। आश्रम में बैठे सभी लोग इस चमत्कार को देखकर आश्चर्य चकित हो गये । महाराज जी ने कहा, “तुम अब बिल्कुल ठीक हो, मन्दिर में मत्था टेको और जाओ।” हम तीनों जब मंदिर में मत्था टेकने गये तो मेरी सास संत श्रद्धाराम जी का फोटो देखकर हैरान रह गई क्योंकि वह बहुत पहले एक बार उनसे सहारनपुर में मिल चुकी थी। पूछने पर जब मेरी सास को यह पता लगा कि संत श्रद्धाराम जी नन्दाचौर वाले, अमर सिंह महाराज जी के गुरु हैं तो वह और भी खुश हुई क्योंकि उसके कई रिश्तेदार नन्दाचौर तथा सहारनपुर दरबार के सेवक हैं। मेरी सास ने महाराज जी से प्रार्थना की कि वह मोना को एक पुत्र दे दें। महाराज जी ने कहा कि यदि दोनों पति-पत्नी ढक्का मन्दिर में नौ दिन मत्था टेके तो पुत्र भी मिल जाएगा।
मोना
ए-1/69 सैक्टर-8,
रोहिणी, दिल्ली-85
फोन-7271596
मैं किशन चन्द बल्ली, श्री प्रेमचन्द कालका के साथ संत श्रद्धाराम आश्रम में आया। महीने भर से मेरी आवाज बंद थी। अलग-अलग डॉक्टरों ने अलग-अलग बीमारी बताई और इलाज भी कराया लेकिन कोई आराम नहीं आया। अन्त में अस्तपाल के ई०एन०टी० स्पेश्लिस्ट ने ऑपरेशन करने को कहा मगर प्रेमचन्द जी आग्रह करके मुझे कर्नल अमरसिंह जी महाराज के पास ले आये। महाराज जी ने मेरे गले पर हाथ फेरा और मैं उसी समय बोलने तथा बातें करने लगा। मैंने बापूजी के मन्दिर में मत्था टेका और उनके गुणगान करते हुए बोला “बापू तूने मूझे दवा दारू के खर्च तथा ऑपरेशन के कष्ट से बचा लिया, केवल आशीर्वाद और दया-भरे हाथ से चमत्कारिक ढंग से मेरा कष्ट हर लिया तेरी माया तू ही जाने” ऐसा कहते हुए आनन्दित होकर आश्रम से घर आया।
किशनचन्द बल्ली
सी-4/168ए लॉरेन्स रोड, दिल्ली
मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी ठीक करना