मैं मतेन्द्र कुमार गर्ग, अक्सर बीमार रहता था। डॉक्टरों ने मुझे हृदय रोगी घोषित कर रखा था। मैं हमेशा चारपाई पर पड़ा रहता था। मेरा शरीर कुछ भी करने के लायक नहीं था। मैं मोदीनगर अस्पताल में आठ दिनों से भर्ती था, किन्तु दवाओं से मुझे कोई आराम नहीं आया। मुझे इस आश्रम के बारे में पता चला तो मैं अस्पताल से ही 12 दिसम्बर 1994 को गुरुजी से आकर मिला । गुरुजी ने मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। मैं तब ही से बिल्कुल ठीक हूँ। अब मुझे कोई परेशानी नहीं है। गुरुजी ने न तो कोई दवा दी और न ही मुझसे पैसा लिया। केवल गुरुजी ने मुझे दुआएँ व आशीर्वाद दिया । डॉक्टरों ने भी अब मुझे पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया है।
मतेन्द्र कुमार गर्ग
शिवपुर-निवाड़ी रोड गली नं0-3
शिव मंदिर के पास मोदीनगर.
गाजियाबाद (उ0प्र0)
मैं ओम् प्रकाश टण्डन, आयु 55 वर्ष, मुझे 31 दिसम्बर 1983 को पहला जबरदस्त हार्टअटैक (दिल का दौरा) हुआ। मुझे 18 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा और छह महीने घर पर आराम करना पड़ा । 1992 में मुझे फिर से हार्ट की शिकायत रहने लगी। जी०बी० पन्त अस्पताल के डॉक्टरों ने मुझे फौरन ऑपरेशन करवाने की सलाह दी। मैं हर तरह के देसी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक इलाज करवा के थक चुका था। इसी दौरान मुझे गुरुजी के आत्मबोध साधना आश्रम एवं चिकित्सालय के बारे में पता चला। मैंने गुरुजी को जब अपनी व्यथा सुनाई तो उन्होंने मेरी सभी रिपोर्ट्स देखकर कहा, “आपका ऑपरेशन नहीं होगा। मेरे पास लगातार दो महीने तक आओ। दो महीने बाद पंत अस्पताल के डॉक्टरों के पास जाना, वे तुम्हारा ऑपरेशन नहीं करेंगे, क्योंकि तुम्हें कोई बीमारी ही नहीं रहेगी ।” गुरुजी के कहे अनुसार मैं आश्रम लगातार आता रहा । 10-15 दिन बाद ही मेरी हालत काफी सुधरने लगी। अब गुरुजी एवं परमात्मा की कृपा से मैं बिल्कुल ठीक-ठाक हूँ। मेरी पत्नी एवं बच्चे भी गुरुजी को ईश्वर का रूप मानते हैं। उनका ऐसा मानना ठीक भी है क्योंकि मैं इतना बेबस हो गया था कि अपने आप सड़क तक पार नहीं कर सकता था और आज गुरुजी की कृपा से मैं ठीक-ठाक हूँ तथा सब काम-धन्धा कर रहा हूँ।
ओमप्रकाश टंडन
सी-4/57 केशव पुरम, लॉरेन्स रोड-दिल्ली-55
दूरभाष नं0-7193391
मैं सूरज प्रकाश, लगभग दो महीने से साँस की बीमारी से परेशान था। मेरे घर वालों ने मेरा जी०बी० पन्त तथा दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल से काफी इलाज करवाया, किन्तु मुझे कोई आराम नहीं आया। दिनों दिन हालत खराब होती चली गई। मुझे छाती दर्द, गला घुटना, चक्कर आना तथा साँस लेने में काफी दिक्कत होती थी। सभी ओर से निराश होने के बाद एक दिन मेरे ससुर मुझे गुरुजी के पास लाए। गुरुजी ने मुझे अपने गले से लगाकर आशीर्वाद दिया। तब से मैं बिल्कुल ठीक हूँ। गुरुजी ने मुझे नया जीवन दिया है। मैं आजीवन उनका ऋणी रहूँगा।
सूरज प्रकाश
खजान बस्ती, नांगल राय
नई दिल्ली-46
लेफ्टिनेन्ट कर्नल ओ०पी० यादव (तोपखाना), मैं एन्जाइना नामक हृदय रोग से पीड़ित था। मुझे आर्मी हॉस्पिटल दिल्ली में मेडीकल केटेगरी पी-3 में डाल रखा था और मेरी पदोन्नति रूकी हुई थी। मैं गुरुजी के पास आया। मुझे गुरुजी ने पूर्णमासी तथा अमावस्या के दिन चबूतरे पर बैठा कर आशीर्वाद दिया। मैं गुरुजी के आश्रम में करीब दस बार गया। इसी दौरान मेरा रीकेटेग्राइजेशन का समय आ गया। इस दौरान जब आर्मी हॉस्पिटल में मेरा चेक अप (जाँच) किया गया, तो मेरे सभी टेस्ट नार्मल निकले। मुझे टेम्पोरेरी केटेगरी-पी-2 में डाल दिया गया। मेरा रुका हुआ प्रोमोशन भी हो गया।
लेफ्टिनेन्ट कर्नल ओ०पी० यादव कमान्डर एन०सी०सी ग्रुप,
हेडक्वार्टर-जोरहाट
मुझे दिल की धड़कन, छाती में दर्द, तथा साँस फूलने की शिकायत थी । काफी इलाज करवाने पर भी मुझे कोई लाभ नहीं हो रहा था। मुझे एस्कोर्ट अस्पताल वाले डाक्टरों ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी । साथ-ही उसके लिए एक लाख पच्चीस हजार रूपये जमा करवाने के लिए कहा। मैं पैसों के लिए भाग-दौड़ कर ही रहा था कि तभी मुझे गुरुजी से मिलने का सौभाग्य हासिल हुआ। महाराज जी के आशीर्वाद से पहले ही दिन मेरी घबराहट और बेचैनी कुछ कम हो गई। गुरुजी ने सात दिन तक लगातार बुलवाया । अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ तथा अपने सभी काम बखूबी कर रहा हूँ। गुरुजी की कृपा से मैं ऑपरेशन तथा ऑपरेशन के मोटे खर्च से बच गया। किसी ने ठीक ही कहा हैं कि निर्बल के बल राम होते हैं।
योगेश
सुपुत्र श्री ऋषिराम गोयल महाजन मोहल्ला गजरौला, जिला मुरादाबाद, (उत्तरप्रदेश)
मैं डॉक्टर गोकलचन्द, मुझे हार्टअटैक हुआ था। कुछ दिनों तक अस्पताल में दाखिल रहने के बाद डॉक्टरों ने तीन महीने का आराम बताते हुए घर भेज दिया। मुझे चलते समय चक्कर आते थे, छाती में दर्द होता था और साँस भी फूलती थी। लिहाजा मैं चारपाई पर ही पड़ा रहता था। गुरुजी मेरे घर आए। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेर कर मुझे आशीर्वाद दिया और मुझसे कहा कि, “बिस्तर छोड़कर अपना सब काम नॉर्मल ढंग से करो, क्लीनिक भी जाओ।” मैं उठकर चलने-फिरने लगा और मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई। उसी दिन मैं गुरुजी के साथ गाजियाबाद में ही एक-दो स्थानों पर भी गया। बाद में गुरुजी ने मुझे वापिस घर छुड़वाया और कहा कि, “अब फिट हो, कार्डिओलोजिस्ट की दवा थोड़े दिन और खाओ। सब काम करो, कोई चिन्ता न करो, ई०सी०जी० आदि चैक करवाने के बाद बता देना।” चैकअप करवाने पर सब ठीक-ठाक निकला। मैं अब अपना सब काम-धन्धा कर रहा हूँ।
डॉ. गोकलचंद
कवि नगर, गाजियाबाद
दूरभाष-8441095